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    हिन्दी दिवस पर हिन्दी प्रेमियों ने कविताओं के माध्यम से उकेरे अपने भाव


    हिन्दी दिवस पर हिन्दी प्रेमियों ने कविताओं के माध्यम से उकेरे अपने भाव

    सहारनपुर/ उत्तर प्रदेश: हिंदी विश्व की एक प्राचीन,समृद्ध और महान भाषा होने के साथ ही हमारी राज्यभाषा भी है। भारत की स्वतंत्रता के बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी  ही भारत की राजभाषा होगी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद ही हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है।

    हिंदी दिवस के अवसर पर कुछ हिंदी प्रेमियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से मातृभाषा के महत्व को कुछ इस तरह बताया है:-

    भारत का अभिमान है हिन्दी

    सरस ,सहज,नवरस अभिलाषा,

    जन-मन- गण की सुरभित भाषा।

    शुभग कलश पूरित नव आशा।।

    ओज परम् शुभ गान है हिन्दी।

    सहज कण्ठ मृदु बान है हिन्दी।

    भारत का अभिमान है हिन्दी।।

    शुभग ,मुदित,मकरन्द यही है,

    भाव,भक्ति,कवि छन्द यही है।

    भारत भू की विस्तृत भाषा।

    संपूर्ण धरा की गंध यही है।।

    संस्कृति देश प्रतिमान है हिन्दी।।

    भारत का अभिमान है हिन्दी।

    प्रेमचन्द्र की अद्भुत रचना,

    अभिव्यक्ति की सरल संरचना।

    गरल काव्य नव छ्न्द विपुल हो,

    हिन्द प्राण प्रण शब्द अतुल हो।

    प्रेम प्रीति रसगान है हिन्दी।

    भारत का अभिमान है हिन्दी।

    मीरा के भावों की गागर,

    महादेवी का अविरल सागर।

    रामकथा शोभित तुलसी की।

    नानक ,कबीर,रसखान है हिन्दी।

    भारत का अभिमान है हिन्दी।

    हृदय कुंज ,भव पुंज सहजता,

    अस्तित्व हिन्द, तम तेज सरसता।।

    अमिय प्रीति से पूर्ण विधा यह,

    मातृभूमि की प्राण सुधा यह।

    आन बान और शान है हिन्दी।

    भारत का अभिमान है हिन्दी।

    हिन्द देश की प्राण प्रिया यह,

    वन्दनीय जन-मान जिया यह।।

    काव्य ,ग्रन्थ,पुराण आत्म भव,

    गीत ,रीत  ,संगीत छन्द नव।

    शारदा सृत वरदान है हिन्दी।

    भारत का अभिमान है हिन्दी।

    विश्व पद्म पद पावन हिन्दी,

    सरस,सहज मनभावन हिन्दी।

    शाश्वत मृदुल लुभावन हिन्दी।।

    जन मन रंजन गायन हिन्दी।।

    'आशा' की पहचान है हिन्दी।

    भारत का अभिमान है हिन्दी।

    आशा त्रिपाठी

    जिला कार्यक्रम अधिकारी


    हिन्दू हूं मैं, हिन्दी भाषा देश हिंदुस्थान।

     हिन्दी से ही विश्व मे अपनी है देखो पहचान

    हिन्दी पढ़ो लिखो जी हिन्दी, हिन्दी देश की है शान

    अपनी भाषा से बनाता है जग में देश महान

    हिन्दी दिवस पर संकल्प उठाए भारत की संतान

    काम काज हिन्दी में करेंगे ,देंगे सम्मान।

    गौकरण दत्त शर्मा, कवि,लेखक,चिंतक, विचारक

    हिन्दी मेरा सम्मान

    हिन्दी भाषी हूँ, हिन्दी मेरा सम्मान है अभिमान है।

    सारी भाषाएं तारो सी,हिन्दी रवि तुल्य महान है।


    यह वो भाषा है जिसकी लिपि और उच्चारण एक समान है।

    जैसा बोलो वैसा ही लिखो क्या ,कोई और इसके समान है?

    सुर कबीर तुलसी भारतेंदु इसकी ही सन्तान है।

    सारी भाषाएं तारों सी,हिन्दी रवि तुल्य महान है।।


    इसका साहित्य संसार मे गर्वित, चर्चित और निराला है।

    इसमें मनोरंजन मात्र नही यह जीवन सिखाने वाला है।

    निराशा से बचाने के लिए यह आशा का आह्वाहन है।

    सारी भाषाएं तारो सी,हिन्दी रवि तुल्य महान है।।


    मन दुखता है जब देश मे भाषा अपना सम्मान खोती है।

    अंग्रेजी का बोलबाला देख यह सिसक सिसक कर रोती है।

    हमे इसे प्रतिष्ठित करना और दिलाना इसे सम्मान है।

    सारी भाषाएं तारो सी,हिन्दी रवि तुल्य महान है।।

    संगीता शर्मा, अध्यापिका

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