पितृ पक्ष विशेष- श्रद्धा और आस्था के साथ अपने पूर्वजों का स्मरण
पितृ पक्ष विशेष- श्रद्धा और आस्था के साथ अपने पूर्वजों का स्मरण
सहारनपुर/उत्तर प्रदेश: पितृ पक्ष पितरो के प्रति श्रद्धा का पर्व है। इन दिनों पितरों को याद किया जाता है और उनका आर्शीवाद प्राप्त किया जाता है। पितरों की कृपा प्राप्त होने से जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूर्वज धरती पर आते हैं और आभार प्रकट करने वालों को अपना आर्शीवाद और अनादर करने वालों को देकर जाते हैं।
पितृ पक्ष के दौरान पितरो में आस्था और श्रद्धा रखने वाले लोग बड़े भाव से अपने पितरों का श्राद करते है। श्रद्धा के इस पर्व के अवसर पर कुछ लोगों ने पितरो से प्रेरित होकर अपने भाव News 10 भारत के साथ साझा किए हैं।
पंडित संजय शास्त्री का कहना है कि मेरे पिताजी एक साधारण परिवार में जन्म लेने वाले असाधारण व्यक्ति थे। उन्होंने मुझे जीवन की हर परेशानी का सामना हिम्मत से करना सिखाया।वह एक खुश दिल इंसान थे।चाहे वह गांव में रहे हो या शहर में जहां भी रहे सब को अपना बनाकर ही रहे। वह सब की सहायता करने को हमेशा तैयार रहते थे।उनके अच्छे व्यवहार का ही परिणाम है कि उन्हें याद करके जितना हम रोते हैं उतना ही उनसे मिलने जुलने वाला हर आदमी भी भावुक जाता है। उनकी शिक्षा यही थी कि इस दुनिया में कुछ भी लेकर नहीं जाना है। हम जितना दूसरों के लिए खर्च करते हैं उससे कहीं अधिक ईश्वर हमें देते हैं। मैं उनके आदर्शो पर चलने का प्रयास कर रहा हूं। मुझे पता है कि उनका प्रेम और आशीर्वाद मेरे साथ है और हमेशा रहेगा।
पैरामाउंट ट्यूलिप निवासी एडवोकेट गौकरण दत्त शर्मा कहते हैं कि "मेरे पूज्य, प्रात: स्मरणीय देवतूल्य पिता श्री व माता श्री का ह्रदय से नमन, वन्दन करता हूँ।
उनका यह वाक्य कि ----
नेकी करो कुएँ में डालो, मुझे सदा प्रेरणा देता है , दूसरे अपने कर्तव्य का पालन करो, ईश्वर में अटूट विश्वास रक्खो और प्राणीमात्र मैं ईश्वर का दर्शन करो, उनके इन आदर्शों पर चलकर मैं सदा प्रसन्न रहता हूँ, मेरा सभी से व्यवहारिक नाता है, इस दुनिया में उनकी इस प्रेरणा से कि नेकी करो कुएँ में डालो के कारण मेरा कोई शत्रु नहीं है, उनका आशीर्वाद सदा परिवार पर बना रहे।
पटेल नगर निवासी विनय बख्शी का कहना है कि उनके पिताजी स्व. देवीश्वर लाल बख्शी जी मेहनती और ईमानदार व्यक्ति थे। उन्होंने हमें भी हमेशा मेहनत और ईमानदारी से काम करने के संस्कार दिए। उनकी शिक्षा को ग्रहण करके वह भी उनके बताए मार्ग पर चल रहे हैं।
कपिल विहार निवासी विनोद मिगलानी का कहना है कि उनके पिताजी स्व सतराम दास मिगलानी जी एक दरिया दिल व्यक्ति थे। उनसे किसी का भी दुख दर्द देखा नहीं जाता था। उन्होंने हमें यही शिक्षा दी कि दूसरों पर परोपकार करते रहना चाहिए। उनके दिखाए मार्ग पर हम सभी परिवार जन चलने की कोशिश कर रहे हैं। और उनका आशीर्वाद आज भी अपने ऊपर महसूस करते हैं।
रिपोर्ट-अवनीश
News 10 भारत
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