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    अद्वैत वेदांत के प्रणेता आदि शंकराचार्य की जयंती पर देशभर में श्रद्धा का माहौल

     अद्वैत वेदांत के प्रणेता आदि शंकराचार्य की जयंती पर देशभर में श्रद्धा का माहौल

    सहारनपुर / उत्तर प्रदेश: आदि शंकराचार्य की जयंती हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और विशेष महत्व रखती है। इस अवसर पर उनके जन्म और अद्वितीय योगदान का स्मरण किया जाता है। उन्हें महान संत, गुरु और दार्शनिक के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने अद्वैत वेदांत के माध्यम से सनातन धर्म को नई दिशा प्रदान की।

    भारतीय धार्मिक इतिहास में उन्हें सर्वोच्च गुरुओं और विद्वानों में गिना जाता है। उन्होंने परमात्मा, आत्मा, वैराग्य और मोक्ष जैसे गूढ़ विषयों पर समाज को ज्ञान दिया। वेदों और उपनिषदों पर उनकी गहरी पकड़ थी, जिसे उन्होंने सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचाया। यही कारण है कि आज भी उनका योगदान अत्यंत श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है।

    धर्म और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के उद्देश्य से उन्होंने देश की चारों दिशाओं में चार प्रमुख मठों—कालिका मठ, गोवर्धन मठ, शारदा मठ और ज्योतिर्मठ—की स्थापना की। इन मठों की जिम्मेदारी उन्होंने अपने योग्य और समर्पित शिष्यों को सौंपी, जिन्हें वेद, उपनिषद और अन्य धार्मिक ग्रंथों का गहन ज्ञान देकर समाज में धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए तैयार किया। सनातन धर्म के चारों वेद—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—के प्रचार-प्रसार में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

    मान्यता के अनुसार, उनका जीवनकाल अल्प रहा, लेकिन उनके कार्य अत्यंत व्यापक और प्रभावशाली रहे। उन्होंने पंचायतन पूजा पद्धति की शुरुआत की, जिसमें भगवान शिव, देवी शक्ति, भगवान विष्णु, भगवान सूर्य और भगवान गणेश की उपासना की जाती है। कहा जाता है कि उन्होंने मात्र 16 वर्ष की आयु में वेदों का गहन ज्ञान प्राप्त कर लिया था। उनके द्वारा रचित अनेक स्तोत्र, ग्रंथ और धार्मिक पुस्तकें आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

    इस संदर्भ में शारदा पीठ से जुड़े जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ महाराज के सलाहकार हिमांशु जैन ने बताया कि आदि शंकराचार्य केरल से यात्रा कर कश्मीर स्थित शारदा पीठ पहुँचे और वहीं विराजमान हुए। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत को ब्रह्मा के आदेश पर माता सरस्वती ने कृष्णा नदी के तट पर छिपाया और उस पर पिंडी स्थापित की, जिससे यह स्थान शारदा पीठ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

    बताया गया कि आदि शंकराचार्य ने इस पीठ को विशेष महत्व प्रदान करते हुए चारों मठों की स्थापना की और प्राचीन काल से ही शारदा पीठ को प्रमुख पीठ माना गया। वर्तमान में यह पवित्र स्थल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित है, और परंपरा के अनुसार इस पीठ से जुड़े वर्तमान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ महाराज माने जाते हैं।

    रिपोर्ट :अवनीश कुमार 

    News 10 भारत 

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